झुंझुनू में ओलों की मार, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
झुंझुनू, राजस्थान – राजस्थान के झुंझुनू जिले में बीते दिनों आए ओलावृष्टि और तूफान ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। 18 और 19 फरवरी की रात को आए इस भीषण तूफान ने हजारों हेक्टेयर फसलों को बर्बाद कर दिया। गेहूं, चना, सरसों, मसूर जैसी प्रमुख फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

ओलों की मार से तबाह हुए खेत
झुंझुनू के तोगड़िया और आसपास के इलाकों में खेतों में सफेद चादर जैसी ओलों की परत बिछ गई। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतना भयानक ओलावृष्टि देखा है।
एक किसान ने भावुक होते हुए कहा, “मेरी उम्र 62 साल हो गई, लेकिन मैंने कभी इतनी भारी तबाही नहीं देखी। हमारे खेतों में फसलें बिल्कुल तबाह हो चुकी हैं।”
ओलों की मार इतनी तीव्र थी कि खेतों में खड़ी गेहूं और सरसों की फसलें पूरी तरह से गिर गईं। कई जगहों पर फसलों की बालियां टूटकर बिखर गईं, जिससे उत्पादन की संभावना शून्य हो गई है।
प्रशासन की सुस्ती, किसानों में आक्रोश
तूफान और ओलावृष्टि के बाद किसानों को प्रशासन से मदद की उम्मीद थी, लेकिन अब तक प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई ठोस राहत नहीं मिली है। स्थानीय किसानों का कहना है कि कुछ जगहों पर पटवारी और सरकारी कर्मचारी पहुंचे, लेकिन अभी तक किसी तरह की सहायता या मुआवजे की घोषणा नहीं की गई है।
एक किसान ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “दो दिन से घर में खाना नहीं बना, खेत में जो मेहनत की थी, सब तबाह हो गया। प्रशासन को चाहिए कि तुरंत सर्वे करवाकर किसानों को राहत राशि दी जाए।”
भारी बारिश और ओलावृष्टि का असर
- फसल नुकसान: गेहूं, चना, सरसों, मसूर और अन्य रबी फसलें 80-90% तक बर्बाद हो गईं।
- किसानों पर संकट: खेतों में गिरने वाले ओलों ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया, अब कर्ज चुकाने का संकट गहरा गया है।
- प्राकृतिक आपदा का कहर: स्थानीय लोग इसे पिछले कई सालों की सबसे भीषण ओलावृष्टि बता रहे हैं।
किसानों के लिए मुआवजा और राहत की मांग
किसानों का कहना है कि राज्य सरकार को जल्द से जल्द सर्वे करवाकर उचित मुआवजा देना चाहिए, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति थोड़ी संभल सके। साथ ही, केंद्र सरकार से भी आपदा राहत कोष से मदद देने की अपील की जा रही है।
झुंझुनू में प्राकृतिक आपदा: अब आगे क्या?
इस प्राकृतिक आपदा के चलते किसान अब सरकार की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। कृषि विभाग और प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर किसानों को आर्थिक सहायता मुहैया कराए, जिससे वे अपने खेतों को फिर से संवार सकें।
