जयपुर के मशहूर जिम ट्रेनर गोविंद की प्रेरणादायक कहानी
जयपुर के फिटनेस इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम, गोविंद, जो कभी मिस्टर राजस्थान और दो बार मिस्टर जयपुर रह चुके हैं, ने हाल ही में अपने जीवन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना किया। हिप जॉइंट की गंभीर समस्या से जूझ रहे गोविंद को इतना दर्द होने लगा कि वे लंगड़ाकर चलने लगे। इस तकलीफ ने न सिर्फ उनके करियर बल्कि उनकी पूरी जिंदगी को प्रभावित कर दिया।

आइए जानते हैं, कैसे हुआ यह दर्दनाक सफर, किस तरह उन्होंने ऑपरेशन का फैसला लिया, और अब वे कैसे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
2 साल की पीड़ा: जब दर्द बन गया जीने की सबसे बड़ी बाधा
गोविंद के अनुसार, डेढ़ से दो साल पहले उन्हें हल्का दर्द महसूस हुआ, जिसे उन्होंने सामान्य जिम इंजरी समझकर नजरअंदाज कर दिया। समय बीतने के साथ यह दर्द बढ़ता गया और एक समय ऐसा आया जब वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे।
उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज, फिजियोथेरेपी और कई देसी इलाज आजमाए, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। फाइनेंशियल प्रॉब्लम भी बढ़ती जा रही थी, क्योंकि इलाज के लिए वे लगातार पैसे खर्च कर रहे थे और जिम का काम भी प्रभावित हो रहा था।
नवीन शर्मा का चमत्कारिक इलाज: ऑपरेशन ने बदल दी जिंदगी
जब सारे इलाज फेल हो गए, तब गोविंद ने डॉ. नवीन शर्मा से संपर्क किया। डॉक्टर्स ने उनका एक्स-रे और अन्य मेडिकल टेस्ट करने के बाद बताया कि उनकी हिप जॉइंट की समस्या थर्ड स्टेज पर पहुंच चुकी है। इसका मतलब था कि अब सर्जरी के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था।
गोविंद ने तुरंत ऑपरेशन का फैसला किया, जो सफलतापूर्वक डॉ. नवीन शर्मा की टीम द्वारा किया गया। ऑपरेशन के दौरान उन्हें पता ही नहीं चला कि कब सर्जरी पूरी हो गई, क्योंकि डॉक्टर लगातार उनसे बातचीत कर रहे थे, जिससे उनका डर खत्म हो गया।
ऑपरेशन का खर्च और अस्पताल का अनुभव
गोविंद ने बताया कि ऑपरेशन का कुल खर्च लगभग 2.5 लाख रुपये आया। हालांकि, जब अन्य मेडिकल खर्चों को भी जोड़ा गया, तो यह करीब 6 लाख रुपये तक पहुंच गया।
उन्होंने अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर नवीन शर्मा की जमकर तारीफ की और कहा कि वहां बेहतरीन सुविधाएं दी गईं। ऑपरेशन के कुछ ही दिनों बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया और वे पूरी तरह से रिकवरी की ओर बढ़ने लगे।
15 दिन में वापसी: फिटनेस की दुनिया में फिर से नया सफर
सर्जरी के बाद गोविंद को 15 दिनों तक पूरी तरह बेड रेस्ट करना पड़ा। लेकिन, 15वें दिन ही वे वापस जिम पहुंचे और धीरे-धीरे एक्सरसाइज शुरू कर दी।

आज गोविंद फिर से पूरी तरह से फिट और स्वस्थ हैं। वे न सिर्फ अपना जिम चला रहे हैं, बल्कि खुद भी ट्रेनिंग दे रहे हैं और पूरी तरह से नॉर्मल लाइफ जी रहे हैं।
गोविंद के लिए सबसे बड़ी ताकत: परिवार और दोस्त
हर मुश्किल घड़ी में मजबूत मानसिकता और अपनों का साथ बहुत मायने रखता है। गोविंद के अनुसार, उनके बेटे ने उन्हें इस कठिन समय में सबसे ज्यादा मोटिवेट किया।
उनका बेटा न केवल उनके साथ था, बल्कि जिम के संचालन में भी उनकी मदद करता रहा। इससे गोविंद को ऑपरेशन के दौरान और बाद में मानसिक शांति और सहारा मिला।
हेल्थ से जुड़ी यह बड़ी सीख: सही समय पर सही इलाज जरूरी
गोविंद की यह प्रेरणादायक कहानी हमें सिखाती है कि:
✔️ छोटी समस्या को नजरअंदाज न करें – अगर दर्द या कोई समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
✔️ देसी इलाज और फिजियोथेरेपी हमेशा हल नहीं होते – सही मेडिकल ट्रीटमेंट पर भरोसा करें।
✔️ मेंटल स्ट्रेंथ और पॉजिटिविटी जरूरी है – कठिन समय में धैर्य रखना सबसे अहम होता है।
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यह गोविंद की कहानी सिर्फ एक फिटनेस ट्रेनर की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जो किसी भी कठिनाई को हिम्मत और सही फैसले से पार कर सकते हैं। 🚀💪