चूरू | – राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए चूरू महोत्सव का आज भव्य शुभारंभ हुआ। यह उत्सव स्वामी गोपाल दास जी चौक से शुरू हुआ, जो चूरू शहर की आत्मा के रूप में जाना जाता है। तीन दिवसीय इस महोत्सव में संस्कृति, कला, साहित्य और लोक परंपराओं की अद्भुत झलक देखने को मिलेगी।

महोत्सव का हुआ शानदार शुभारंभ
महोत्सव के पहले दिन का आगाज शानदार तरीके से हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, गणमान्य व्यक्तियों और बड़ी संख्या में आए नागरिकों की मौजूदगी में हुआ। पूरे शहर में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया।
अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया: एक अधिकारी ने महोत्सव के दौरान कहा, “यह चूरू के लिए गौरव की बात है। यह महोत्सव हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखेगा। चूरू के वासी इसमें बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं, जिससे इस आयोजन की भव्यता और बढ़ गई है।”
तीन दिन तक होंगे विविध कार्यक्रम
इस महोत्सव में लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत, साहित्यिक संगोष्ठी, कला प्रदर्शनी और विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। खासकर, बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जिनमें वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।
पहले दिन के प्रमुख आकर्षण:
- रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- लोक कलाकारों का अद्भुत प्रदर्शन
- ऐतिहासिक और साहित्यिक चर्चा सत्र
- स्कूली बच्चों द्वारा कला और संगीत कार्यक्रम
अगले दो दिनों में क्या होगा?
आने वाले दिनों में विभिन्न तरह के पारंपरिक खेल, राजस्थानी लोक नृत्य और संगीत, तथा हस्तशिल्प और खान-पान से जुड़ी गतिविधियां महोत्सव का हिस्सा होंगी।
प्रवासियों की नजर में चूरू महोत्सव
चूरू महोत्सव केवल स्थानीय नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रवासी चूरू वासियों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जो लोग वर्षों पहले चूरू छोड़कर देश-विदेश में बसे हैं, वे भी इस आयोजन से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।
एक स्थानीय प्रवासी ने कहा, “हमारा चूरू एक बार फिर अपनी संस्कृति और परंपराओं के साथ दुनिया के सामने आ रहा है। यह देखना बेहद सुखद है कि हमारी विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है।”
चूरू की ऐतिहासिक धरोहर और महोत्सव का महत्व
चूरू शहर अपनी ऐतिहासिक धरोहर, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए प्रसिद्ध है। यह महोत्सव न केवल चूरू की पहचान को और मजबूत करता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा देता है।

इस आयोजन से स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और व्यावसायिक संगठनों को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि महोत्सव में बड़ी संख्या में पर्यटकों और दर्शकों के आने की संभावना है।
चूरू महोत्सव बना आकर्षण का केंद्र
महोत्सव के पहले दिन ही हजारों की संख्या में लोग इसमें भाग लेने पहुंचे। भीड़ में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी शामिल थे।
कैमरा पर्सन पुनीत सोनी के साथ, ललित शर्मा – झलको राजस्थान