परिचय
राजस्थान की तपती ज़मीन, सूखा मौसम और सीमित संसाधन… इन परिस्थितियों में खेती करना किसी चुनौती से कम नहीं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन कठिनाइयों को मात देकर मिसाल बन जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति की कहानी बताएंगे, जिसने केवल चाय और रोटी खाकर 3 साल तक संघर्ष किया और बंजर ज़मीन को हरियाली में बदल दिया।
यह कहानी है एक सामान्य किसान की, जिसका जज़्बा और आत्मविश्वास आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

शुरुआत हुई ज़मीनी हकीकत से
इस किसान ने जब शुरुआत की, तब उसके पास न तो संसाधन थे, न तकनीकी ज्ञान। उसके पास थी तो बस एक जिद – अपनी ज़मीन को उपजाऊ बनाना।
कहते हैं, “जहां चाह वहां राह।” कुछ ऐसा ही हुआ इस कहानी में भी। उसने दिन-रात एक कर दिया। सुबह से शाम तक काम और सिर्फ चाय और रोटी पर ज़िंदगी गुजारना – यही उसकी दिनचर्या बन गई थी।
बंजर ज़मीन – जहां उगता नहीं था कुछ
जिस ज़मीन पर वह काम कर रहा था, वहां पहले कोई फसल नहीं होती थी। मिट्टी में न नमी थी, न पोषण। नहरें दूर थीं और बारिश भी सीमित। गांव के कई लोग उस ज़मीन को देखकर कहते थे, “इसमें कुछ नहीं उग सकता।” लेकिन इस किसान ने हार नहीं मानी।
उसने सबसे पहले ज़मीन को समझा – मिट्टी की जांच करवाई, जैविक खाद डाली और फिर धीरे-धीरे छोटी फसलें लगाने की शुरुआत की। एक बार असफलता मिली, दूसरी बार भी… लेकिन तीसरी बार में मेहनत रंग लाई।
संघर्ष के तीन साल – चाय, रोटी और मेहनत
ये तीन साल इस किसान के लिए किसी तपस्या से कम नहीं थे। न कोई आराम, न कोई छुट्टी। परिवार के सपोर्ट के बिना भी उसने हार नहीं मानी।
दिन में खेत में काम, रात को योजनाएं बनाना। उसके पास कोई आधुनिक उपकरण नहीं थे। सब कुछ हाथ से किया गया – बीज बोना, पानी देना, निराई-गुड़ाई।
इस दौरान उसने फसलों के बारे में यूट्यूब और कृषि विभाग से जानकारी इकट्ठा की। जैविक खेती को अपनाया और रसायनों से दूरी बनाए रखी।

हरियाली की वापसी – फसलें और पहचान
तीन साल के भीतर उस ज़मीन पर हरियाली लौट आई। सबसे पहले उगी मूंग की फसल, फिर गेहूं और बाजरा। गांव के लोग जो कभी हंसते थे, अब उस ज़मीन को देखकर दंग रह गए।
आज उस किसान की ज़मीन पर कई तरह की फसलें होती हैं। वह न सिर्फ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा है, बल्कि गांव के दूसरे किसानों को भी मार्गदर्शन दे रहा है।
सरकार और समाज से उम्मीद
इस संघर्ष की कहानी हमें बताती है कि अगर सरकार और समाज ऐसे मेहनती किसानों की मदद करें, तो देश के हर कोने में कृषि क्रांति लाई जा सकती है।
ऐसे किसान को सरकारी सम्मान, अनुदान और आधुनिक तकनीकी सहायता मिलनी चाहिए ताकि उनका आत्मबल और बढ़े और वे बाकी किसानों के लिए मार्गदर्शक बनें।
प्रेरणा बन चुकी है यह कहानी
आज यह किसान न केवल अपनी मेहनत से फसल उगा रहा है, बल्कि सैकड़ों युवाओं को प्रेरित भी कर रहा है। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर उसकी कहानी वायरल हो रही है।
इस संघर्ष ने साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो तो बंजर ज़मीन को भी हरा-भरा बनाया जा सकता है।
निष्कर्ष: मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल
Jhalko Rajasthan की इस विशेष रिपोर्ट में हमने देखा कि कैसे एक आम किसान ने चाय-रोटी के सहारे तीन साल तक संघर्ष किया और राजस्थान की बंजर ज़मीन को हरियाली में बदल दिया।
यह कहानी न सिर्फ किसानों के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता है।
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