एससी-एसटी एक्ट में सहायता राशि बढ़ाने की जरूरत

राजस्थान विधानसभा में सुजानगढ़ के विधायक मनोज मेघवाल ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली सहायता राशि और तकनीकी खामियों को दूर करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में एफआईआर में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बाद में जोड़ी जाती हैं, लेकिन विभाग की ओर से सहायता राशि का प्रावधान पहले से तय होता है। इससे पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती।
विधायक मेघवाल ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति शुरू में लापता हो और बाद में हत्या का मामला सामने आए, तो एससी-एसटी एक्ट के तहत जुड़ी धाराओं के कारण सहायता राशि मिलने में दिक्कत आती है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि इस तकनीकी समस्या को जल्द से जल्द हल किया जाए ताकि जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सके।
एससी वर्ग के लिए सामुदायिक भवन निर्माण की जरूरत
विधानसभा में विधायक ने एससी वर्ग के लिए सामुदायिक भवन निर्माण की भी मांग की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सरकार द्वारा इन भवनों के लिए 101 लाख रुपये की राशि दी जाती है, जो पर्याप्त नहीं है। इस राशि को बढ़ाने की जरूरत है ताकि इन भवनों को बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित किया जा सके।
उन्होंने बताया कि एससी समुदाय के लोग विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए स्कूलों का उपयोग करते थे, लेकिन अब शिक्षा विभाग कार्यदिवसों में स्कूलों को ऐसे आयोजनों के लिए देने से इनकार कर देता है। ऐसे में, सरकार को सामुदायिक भवनों के लिए बजट बढ़ाना चाहिए ताकि एससी समुदाय के लोगों को उचित सुविधाएं मिल सकें।
हॉस्टल बजट बढ़ाने की मांग
मनोज मेघवाल ने एससी वर्ग के छात्रों के लिए बनाए गए हॉस्टलों के बजट को भी बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के कारण वर्तमान बजट पर्याप्त नहीं है और इससे छात्रों को परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में पढ़ने वाली बच्चियों को भी उचित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में सरकार को हॉस्टल और छात्रावासों का बजट बढ़ाकर छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।
निष्कर्ष
सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल ने विधानसभा में एससी-एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली सहायता राशि, सामुदायिक भवनों के निर्माण और हॉस्टल बजट बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि इन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए ताकि समाज के पिछड़े वर्गों को राहत मिल सके।