बीकानेर। राजस्थान के स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर अनियमितताओं और वित्तीय घोटालों के आरोप लग रहे हैं, जिससे छात्र, शिक्षक और आम नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है।

कुलपति पर लगे गंभीर आरोप
विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के अनुसार, विश्वविद्यालय में प्रोफेसरों की नियुक्ति में अनियमितताएं बरती गई हैं। कई नियुक्तियां ऐसे लोगों की हुई हैं जिनका पहले से ही आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इसके अलावा, कुलपति स्वयं प्रोफेसर नहीं हैं, बावजूद इसके उन्हें वाइस चांसलर नियुक्त कर दिया गया।
छात्रों का धरना और विरोध प्रदर्शन
कई दिनों से विश्वविद्यालय के छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया में घोर अनियमितताएं की गई हैं और बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटाले हुए हैं। छात्रों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए।
- कुलपति को उनके पद से हटाया जाए।
- अनियमित तरीके से नियुक्त किए गए प्रोफेसरों की समीक्षा हो।
- भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
राज्यपाल और सरकार से कार्रवाई की मांग
छात्रों और कई शिक्षकों ने राजस्थान सरकार और राज्यपाल से गुहार लगाई है कि विश्वविद्यालय में फैले भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की जाए। छात्रों का कहना है कि यदि इस मामले में जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो वे अपना विरोध और तेज करेंगे।
भ्रष्टाचार के चौंकाने वाले मामले
विश्वविद्यालय में केवल नियुक्तियों में ही नहीं, बल्कि अन्य वित्तीय लेनदेन में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। हाल ही में खुलासा हुआ कि विश्वविद्यालय ने अनावश्यक रूप से लाखों रुपये के फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ऑटोमेटिक वॉशिंग मशीन खरीदी हैं।
इसके अलावा, फीस में हर साल 10% की बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय का प्रशासन केवल पैसे कमाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि शिक्षा की गुणवत्ता गिरती जा रही है।
विपक्षी नेताओं का समर्थन
भ्रष्टाचार के इस मामले में राजनीतिक दलों ने भी हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। किरोड़ी लाल जी समेत कई अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात कर उन्हें समर्थन देने की बात कही है। उन्होंने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
क्या कहती है सरकार?
राजस्थान सरकार के उच्च अधिकारियों ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ जांच बैठाने से कुछ नहीं होगा, बल्कि ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्या होगा आगे?
अगर सरकार जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले सकता है। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे पूरे राज्य में इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करेंगे।
