राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मच गई जब डोटासरा ने निलंबन पर अपनी प्रतिक्रिया दी और इंदिरा गांधी बयान पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्पष्ट रूप से इनकार किया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सदन में काफी गहमागहमी रही।

डोटासरा का बयान: निलंबन पर अपनी बात रखी
माननीय अध्यक्ष महोदय का धन्यवाद देते हुए डोटासरा ने कहा कि अध्यक्ष ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के साथ संवाद कर गतिरोध समाप्त करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष को सदन के माध्यम से अपनी बात रखने की अनुमति मिलनी चाहिए और अध्यक्ष ने सदैव इसका संरक्षण किया है।
डोटासरा ने बताया कि प्रतिपक्ष के विरोध का कारण मंत्री द्वारा भारत रत्न स्वर्गीय इंदिरा गांधी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करना था, जिसे हटाने की मांग की जा रही थी। इस विवाद के चलते विपक्ष सदन में हंगामा कर रहा था और गतिरोध तीन दिनों तक बना रहा।
गहलोत ने इंदिरा गांधी बयान पर किया इनकार
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर किसी तरह की अमर्यादित टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक विवाद है जिसे विपक्ष बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
गहलोत ने कहा कि सदन में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार का उद्देश्य सदन की गरिमा को बनाए रखना है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह बिना वजह सदन की कार्यवाही में बाधा न उत्पन्न करे।
विपक्ष का पलटवार
नेता प्रतिपक्ष जूली साहब ने कहा कि सदन में चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और सत्ता पक्ष को विपक्ष की बात सुननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा विपक्ष को दबाने की है, लेकिन विपक्ष जनता के मुद्दों को उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
समाप्त हुआ गतिरोध
अध्यक्ष महोदय की पहल से आखिरकार तीन दिनों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हुआ। विपक्ष ने आश्वासन दिया कि वह सदन की गरिमा बनाए रखेगा और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएगा।
निष्कर्ष
यह विवाद राजस्थान की राजनीति में एक और बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर सरकार सदन को सुचारू रूप से चलाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के रूप में देख रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा क्या नया मोड़ लेता है।