Jhalko Rajasthan | सीकर
पूर्व उपराष्ट्रपति और राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे श्रद्धेय भैरोंसिंह शेखावत की पुण्यतिथि के अवसर पर सीकर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में भारत के वर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भैरोंसिंह शेखावत मेमोरियल लाइब्रेरी का विधिवत लोकार्पण किया।

भैरोंसिंह शेखावत: ईमानदारी की मिसाल और राजनीति के शिल्पकार
कार्यक्रम में वक्ताओं ने भैरोंसिंह शेखावत को राजस्थान की दहाड़ और ईमानदार राजनीति का प्रतीक बताया। उनका जीवन न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणा रहा है। कई नेताओं ने यह भी कहा कि वे आज जिस मुकाम पर हैं, उसमें भैरोंसिंह शेखावत का मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रमुख रही है।
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने भावुक होकर कहा,
“लाइब्रेरी का लोकार्पण करना ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे भैरोंसिंह जी एक बार फिर हमारे बीच सजीव रूप में उपस्थित हैं।”
किताबों से विशेष लगाव था भैरोंसिंह जी को
कार्यक्रम में यह बात बार-बार दोहराई गई कि भैरोंसिंह शेखावत को पुस्तकों से बेहद लगाव था। उनके परिजनों और नजदीकी लोगों ने बताया कि
“उनके लिए किताबें शायद परिवार से भी ज्यादा प्रिय थीं। वे हर पुस्तक को पढ़ने के बाद उसे व्यवस्थित तरीके से अपने शेल्फ में रखते थे।”
इसी लगाव को ध्यान में रखते हुए यह पुस्तकालय उनके नाम पर स्थापित किया गया है।
लाइब्रेरी की स्थापना का उद्देश्य और महत्व
नरपत सिंह राजवी सहित अन्य वक्ताओं ने बताया कि
“शेखावत जी की स्मृति में पुस्तकालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को अध्ययन के माध्यम से प्रेरित करना है।”
लाइब्रेरी में कई दुर्लभ पुस्तकें, शोध पत्र, और भैरोंसिंह जी के राजनीतिक जीवन से जुड़े दस्तावेज भी संग्रहित किए जाएंगे। यह पुस्तकालय एक आम नागरिक को आदर्श नागरिक और आदर्श राजनेता बनने की प्रेरणा देगा।
राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व की नई दिशा
मंच पर उपस्थित वक्ताओं में राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरवा, कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि
“शेखावत जी ने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया। आज की युवा पीढ़ी उनके जीवन से बहुत कुछ सीख सकती है।”
शेखावाटी का कोहिनूर: भैरोंसिंह शेखावत
कार्यक्रम में विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।

“भैरोंसिंह जी शेखावाटी के कोहिनूर थे। उन्होंने शेखावाटी को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।”
उनके उपराष्ट्रपति बनने के बाद लोगों ने गर्व से कहा कि शेखावाटी की प्रतिभा ने देश को नेतृत्व दिया है।
जनता का स्नेह और श्रद्धांजलि
स्थानीय जनता, राजनीतिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और विद्यार्थी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। एक महिला वक्ता ने भावुक होकर कहा,
“मैं उन्हें ताऊजी कहती थी, उन्होंने ही मुझे राजनीति में लाने का मार्ग दिखाया।”
भविष्य की योजनाएं
कार्यक्रम में यह घोषणा भी की गई कि पुस्तकालय को भविष्य में और भी समृद्ध किया जाएगा। विभिन्न विषयों पर शोध कार्य, सेमिनार और युवाओं के लिए गाइडेंस कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
“जल्द ही सिंधु जल विवाद, अंतरराज्यीय विद्युत विवाद जैसे मुद्दों पर शेखावत जी द्वारा तैयार किए गए पेपर्स भी यहां संग्रहित होंगे।”
निष्कर्ष
भैरोंसिंह शेखावत मेमोरियल लाइब्रेरी का लोकार्पण न केवल एक इमारत का उद्घाटन है, बल्कि यह राजस्थान की मिट्टी से उपजे एक महान नेता की स्मृति को जीवंत करने का प्रयास है। उनके विचार, उनका अध्ययनशील जीवन और राजनीतिक कौशल अब इस पुस्तकालय के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देंगे।
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