बीकानेर – जहां एक ओर लोग आधुनिकता की दौड़ में पर्यावरण को भूलते जा रहे हैं, वहीं बीकानेर के पास स्थित जांबा गांव में एक शख्स ऐसा भी है जो पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का धर्म मान चुका है। ‘भादू भाई’ के नाम से प्रसिद्ध भोमाराम भादू न केवल हजारों होटलों का नाम हैं, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा हैं जो दिखाते हैं कि किस तरह पर्यावरण, पशु-पक्षियों और पेड़ों के लिए समर्पित जीवन जिया जा सकता है।

भादू भाई: एक नाम, एक सोच, एक आंदोलन
भोमाराम भादू, जिन्हें सभी प्यार से ‘भादू भाई’ कहते हैं, का मानना है कि प्रेम और प्रकृति से बढ़कर कुछ नहीं। उन्होंने अपने होटल व्यवसाय की शुरुआत के साथ ही एक अनोखा विचार अपनाया – “एक घर में सौ घर बनाओ”। इसका अर्थ है कि जैसे हम अपने लिए घर बनाते हैं, वैसे ही पक्षियों और जीवों के लिए भी घर बनाना चाहिए। उनके घर की दीवारों पर दर्जनों घोंसले हैं, जो चिड़ियों और कबूतरों का सुरक्षित बसेरा बने हुए हैं।
हजारों होटल और एक नाम – भादू भाई
जब भी आप बीकानेर, जोधपुर या गंगानगर के हाईवे पर सफर करते हैं, तो ‘भादू भाई’ के नाम से दर्जनों ढाबे और होटल मिलते हैं। इन होटलों में पारंपरिक सांगरी, केर-कुमट की सब्जी और बाजरे की रोटी जैसे स्थानीय व्यंजन मिलते हैं। लेकिन खास बात यह है कि ये सिर्फ खाना परोसने की जगह नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण प्रेम की मिसाल भी हैं।
‘भादू भाई’ की पहचान: सादा जीवन, उच्च विचार
भले ही उनका नाम पूरे राजस्थान और गुजरात-महाराष्ट्र तक फैला हुआ हो, लेकिन भादू भाई अब भी गांव में रहते हैं। शहर के शोर से दूर, वो उस वातावरण में जीना पसंद करते हैं जहाँ चिड़ियों की चहचहाहट और शुद्ध हवा हो। वे मानते हैं कि शहरों की चकाचौंध असल में घुटन है, और असली सुख गांव की मिट्टी और हरियाली में है।
पर्यावरण के लिए बलिदान: शहीद शैतान सिंह
भादू भाई का परिवार पीढ़ियों से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए समर्पित रहा है। उनके छोटे भाई के बेटे शैतान सिंह ने एक शिकारी गिरोह को पकड़ते हुए अपनी जान गंवा दी। यह घटना न केवल उनके परिवार की कुर्बानी को दर्शाती है बल्कि उनके मिशन की गहराई को भी उजागर करती है।
कानून की मांग और सरकार से गुहार
भादू भाई ने अब तक बीकानेर, जोधपुर, सांचौर, जैसलमेर, बाड़मेर और गंगानगर जैसे जिलों में वृक्ष कटाई के खिलाफ आंदोलन चलाया है। वे सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि वृक्षों की कटाई पर सख्त कानून बने। उनका मानना है कि “एक वृक्ष की हत्या, दस बच्चों की हत्या के बराबर पाप है।”
उनकी यह लड़ाई अब इतनी गंभीर हो गई है कि वे बीते तीन महीनों से अन्न तक का त्याग कर चुके हैं। केवल फलाहार पर रहकर वे सरकार से वृक्षों की रक्षा के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।
‘भादू भाई’ नाम से हो रही पहचान की चोरी
आज ‘भादू भाई’ नाम इतना प्रसिद्ध हो चुका है कि कई नए होटल इस नाम का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि भादू भाई ने अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की, लेकिन वे यह जरूर कहते हैं कि अगर इस नाम से किसी भी प्रकार का गलत कार्य हुआ, जैसे लूट, धोखा या नशा – तो उन्हें कड़ा कदम उठाना पड़ेगा।

भविष्य की दिशा: प्रकृति, प्रेम और परिवर्तन
भादू भाई का उद्देश्य साफ है –
- वृक्ष बचाना
- जीव-जंतु और पशु-पक्षियों की रक्षा करना
- गौमाता की सेवा
- और समाज में प्रेम व भाईचारे का पुनर्स्थापन
वे कहते हैं, “पहले गांवों में गौशाला खुलती थी, अब वृद्धाश्रम खुलते हैं।” यह बदलाव उन्हें भीतर तक झकझोर देता है।
निष्कर्ष
भादू भाई केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं। उनकी सोच, उनका समर्पण और उनकी मुहिम हम सभी के लिए प्रेरणा है। आज जब पर्यावरणीय संकट बढ़ता जा रहा है, तो ऐसे लोगों की आवाज़ को और बुलंद करना जरूरी है।
🌿 अगर हर कोई अपने घर में पक्षियों के लिए एक घोंसला बना दे, एक पेड़ लगा दे, और थोड़ी-सी करुणा दिखा दे – तो हमारी धरती फिर से हरी-भरी हो सकती है।
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